ब्रेकिंग – शायद यूजीसी ने कोरोना की वैक्सीन बना ली है इसलिए स्टूडेंट्स को प्रमोट नहीं किया जा रहा – ugc guidelines for final year students

क्या ugc ने कोरोना वैक्सीन बना ली है ?

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कोरोना वायरस की वैक्सीन सबसे पहले भारत में बनेगी इस वैक्सीन को किसी वैज्ञानिक या डॉक्टर द्वारा नहीं बनाया जाएगा बल्कि भारत की यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीसन UGC जो कि सभी फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स के भविष्य को बर्बाद करने पर तुली हुई है उसन द्वारा इस वैक्सीन को बनाया जाएगा क्यूंकि ugc ने ठान लिया है कि चाहे कुछ भी हो जाए एग्जाम तो लेनी है और अगर एग्जाम लेनी है तो पहले वैक्सीन तो बनानी पड़ेगी ना ?
एक बात समझ नहीं आती कि यूजीसी ने यह निर्णय किस आधार पर किया है कि फाइनल ईयर की एग्जाम होंगी लेकिन प्रथमौर द्वितीय वर्ष के छात्रों को प्रमोट किया जाएगा क्यों ?
आपने किस आधार पर प्रथम और द्वितीय वर्ष के स्टूडेंट्स की इस लायक समझ लिया ? क्या उनके पास कोई अनुभव है क्या उन्होंने कभी यूनिवर्सिटी के एग्जाम दिए हैं? अगर नहीं तो फिर उनको क्यूं प्रमोट किया जायेगा जबकि अंतिम वर्ष के स्टूडेंट्स के पास अनुभव भी है और वो अंतिम वर्ष में ऐसे भी बहुत अच्छी तैयारी करते हैं ताकि रिजल्ट अच्छा आए और आप लोग उनको बिल्कुल अनपढ़ समझ रहे हैं ।

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अगर ugc की मनमानी की वजह से एक भी स्टूडेंट्स की मौत हुई तो क्या उसके घरवालों को इस कमी की भरपाई यूजीसी ज़िन्दगी में भी कर पाएगा ?
क्या फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स की जान की कोई कीमत नहीं है क्या एक डिग्री की कीमत किसी स्टूडेंट्स की जान से ज्यादा है ? जब जान ही नहीं बचेगी तो डिग्री का क्या करेंगे ऐसी डिग्री को लेकर क्या फायदा जिससे जान पर खतरा आए ।
आपको नहीं पता कि स्टूडेंट्स इस समय कितने मानसिक तनाव की स्थति से गुजर रहे हैं एक तरफ घरवालों का दवाब ऊपर से भविष्य की चिंता भी है  दूसरी तरफ ये भी चिंता है कि कहीं फेल ना हो जाएं क्योंकि आजकल यूनिवर्सिटीज में बहुत घपला होता है पैसे देकर लोग पास हो रहे हैं ऐसे में गरीब लोग रह जाते हैं ।
फाइनल ईयर या किसी भी यूनिवर्सिटी की एग्जाम होने से कितना नुकसान डेढ़ को उठाना पड़ सकता है क्या कभी ये सोचा है ? अगर एग्जाम हुए तो कोरोना संक्रमण के मामलों में जल्द ही भारत पहले नंबर पर होगा । अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान होगा क्योंकि फिर से लॉक डाउन करना पड़ सकता है और फिर वही गरीबी और भुखमरी फैलना तय है ।
अभी तक भारत कोरोना से बहुत हद तके बचा हुआ था लेकिन कुछ अधिकारियों और नेताओं के दिमाग में कलियुग घुस चुका है वो नहीं चाहते कि देश में लोग शांति से रहें उनको कुछ ना कुछ फालतू करना ही है ।
पूरे देश में एक भी स्टूडेंट्स यूजीसी के इस फैसले से सहमत नहीं है क्योंकि एक तरफ भारत में कोरोना के मामले लगातार बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं रोजाना करीब 30 हजार नए मामले सामने आ रहे हैं और दूसरी तरफ अभी तक कोई इलाज या वैक्सीन इसको लेकर नहीं बनी है बड़े बड़े देश कोरोना वैक्सीन को लेकर ट्रायल कर रहे हैं लेकिन अभी तक कोई अच्छी खबर नहीं आयी है ।
लेकिन भारत में अभी तक ये निर्णय नहीं हो पाया है कि स्टूडेंट्स के एग्जाम लेने है या नहीं क्योंकि अगर एग्जाम हुए तो कोरोना का भयानक रूप सामने आ सकता है और भारत की जनसंख्या इतनी है कि अगर एक बार समुदाय संक्रमण हो गया तो लाशों को उठाने वाला कोई नहीं होगा, अभी तक भारत में मृत्यु दर बहुत काम है लेकिन इसकी क्या गारंटी है कि सके बाद ये ज्यादा नहीं होगी ? क्या कोई दावा कर सकता है ?
इतने सारे स्टूडेंट्स को फिर से एग्जाम के लिए बुलाना मतलब कोरोना को खुला निमंत्रण देना क्यूंकि स्टूडेंट्स की वजह से शहरों में जो भीड़ एकत्र होगी उसका अंदाजा आप नहीं लगा सकते , फिर से हॉस्टल भी खोलने पड़ेंगे , बसों में कितनी भीड़ होगी उससे भी संक्रमण बहुत ज्यादा फैलेगा ।
हमारा तो यूजीसी की एक ही सुझाव है कि अगर आपने कोरोना की वैक्सीन बना ली हो तो कृपा करके पूरे देश में वैक्सीन कि सप्लाई करो और फिर खूब एग्जाम करवाओ जिससे देश को कोई नुकसान नहीं हो क्यूंकि आपकी इस गलती का परिणाम पूरे देश को नहीं भुगतना पड़े यही हमारी भगवान से प्रार्थना है इसलिए आप एक बार फिर से सोचकर कोई अच्छा फैसला लो जिससे सबका भला हो देश का भला हो ।
जय हिन्द जय भारत