मैं सुशांत सिंह राजपूत मैंने खुद को नहीं मारा , मुझे मारा गया था

 

मैं सुशांत सिंह राजपूत.. अचानक मेरी आंखों के सामने काला घना अंधेरा छा गया, मुझे कुछ पता नहीं चला कि क्या हुआ? किसने किया? जबतक मैं कुछ भी समझ पाता….. मेरी सांसे थम चुकी थी

 

मुझे तो सिर्फ ये मालूम है कि मैं इतना कमजोर या बुज़्दिल नहीं था, जो अपनी ज़िंदगी को खतम कर दूँ . मैं चीख-चीखकर ये कहना चाहता हूँ कि मैंने आत्महत्या नहीं की है, लेकिन इस दुनिया की हरकतों को देखकर मुझे ये समझ नहीं आ रहा है कि मेरी मौत के रहस्य से पर्दा उठाने के बजाय कुछ लोगों ने इसे सुसाइड बताने का षड्यंत्र रचा 

 

मेरी रहस्यमयी हत्या हो चुकी थी, लोग कहते हैं मेरी डेड बॉडी पंखे से लटकी मिली, हालांकि मुझे ज़रा भी याद नहीं है और ना ही यकीन है कि मैं खुद से ऐसा कर भी सकता था. जब मेरी बॉडी पंखे से लटकी हुई थी तो उसे उतारा किसने? मैं अपनी मौत से जुड़ी सारी सच्चाई दुनिया को बताना चाहता हूं.

 

कूपर ही क्यूँ

क्या कोई ये बात बता सकता है कि बांद्रा में मेरी रहस्यमयी मौत हुई, मुंबई के बांद्रा में कई मशहूर अस्पताल हैं, तो मुझे कूपर अस्पताल क्यों ले जाया गया? जबकि बांद्रा से कूपर अस्पताल की दूरी 7 किलोमीटर से अधिक है. लेकिन आखिर ऐसी क्या वजह थी जिसके चलते पुलिस ने मेरी बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए बांद्रा से अंधेरी ले जाना पड़ा? वो भी कूपर अस्पताल, जो पहले से ही काफी विवादों में रहा है.

 

कई बॉलीवुड हस्तियों की रहस्यमयी मौत को आत्महत्या करार देने को लेकर विवादों में रहने वाले कूपर अस्पताल का कोई जवाब नहीं है. मेरे साथ भी कुछ ऐसी ही कहानी दोहराने की साजिश की गयी थी। चाहें पोस्टमार्टम हो, तहकीकात हो या फिर कुछ नेताजी लोग.. हर कोई मेरी मौत को आत्महत्या साबित करने में जल्दबाजी दिखाने की कोशिश में जुटा हुआ है

 

आप सबसे निवेदन है मेरे न्याय के लिए आवाज उठाते रहना नहीं तो फिर कोई सुशांत  मारा जाएगा और केस बनेगा सुसाइड का ।

 

 

 

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